एरोबिक्स के प्रकार
लो-इम्पैक्ट:
Low-Impact एरोबिक्स शुरुआती लोगों के लिए बढ़िया है। यह दूसरे एरोबिक व्यायामों में आने वाले खिंचाव के बिना एरोबिक वर्कआउट के फायदे देता है। Low-Impact एरोबिक्स में लयबद्ध, नियंत्रित हलचलें होती हैं और हमेशा कम से कम एक पैर ज़मीन पर टिका रहता है। यह व्यायाम अपेक्षाकृत आसान है, जोड़ों पर बोझ नहीं डालता और इसमें करीब 30 मिनट लगते हैं। ट्रेनिंग से पहले वार्म-अप और उसके बाद स्ट्रेचिंग करना ज़रूरी है।
हाई-लो:
High-Low अधिक और कम तीव्रता वाले व्यायामों को मिलाता है। इसमें लयबद्ध हलचलें और कोरियोग्राफी होती है जिसमें दोनों पैर नियमित रूप से फर्श से संपर्क छोड़ते हैं। एरोबिक्स के बुनियादी कदम इस ट्रेनिंग का आधार हैं, इसीलिए यह शुरुआती लोगों के लिए भी उपयुक्त है। पूरे शरीर को शामिल करने के बावजूद High-Low मांसपेशियों या जोड़ों पर बोझ नहीं डालता। नियमित ट्रेनिंग से सहनशक्ति, मोटर समन्वय और भलाई बेहतर होती है।
बॉडी बॉल:
Body Ball में चिकित्सकीय गेंदों का इस्तेमाल होता है। इन गेंदों के साथ व्यायाम उन मांसपेशियों को मज़बूत करता है जो शरीर को सीधा रखने के लिए ज़िम्मेदार हैं—यह रीढ़ को राहत भी देता है, तनावमुक्त होने में मदद करता है और पीठ की दूसरी मांसपेशियों को बेहतर बनाता है। गेंद पर संतुलन बनाना काया को सँवारता है और पैरों, पीठ तथा पेट की मांसपेशियों जैसी कई मांसपेशियों को मज़बूत करता है।
यह एरोबिक्स का सबसे सुरक्षित और बहुत कारगर रूप है जो हर किसी के लिए उपयुक्त है, चाहे उनकी उम्र और सेहत कैसी भी हो—जैसे बुज़ुर्ग या गर्भवती महिलाएँ।
टोटल बॉडी कंडीशन:
TBC एरोबिक्स को मांसपेशियों को गढ़ने वाले व्यायाम के साथ मिलाता है। नियमित ट्रेनिंग आपकी काया और चयापचय को बेहतर बना सकती है और ऊर्जा खर्च करा सकती है।
इसमें गतिशील, तीव्र व्यायाम होते हैं जो न सिर्फ़ आपकी ताकत बढ़ाते हैं बल्कि चयापचय को भी बेहतर करते हैं—इस तरह आप जल्दी ही सुडौल हो सकते हैं, पर याद रखें कि TBC काफ़ी मेहनत वाला है और शुरुआती लोगों के लिए इसकी सलाह नहीं दी जाती।
स्टेप एरोबिक्स:
स्टेप एरोबिक्स ऊर्जा खर्च करने, फिट होने और मांसपेशियाँ बनाने का एक बढ़िया तरीका है।
यह व्यायाम का एक ऐसा रूप है जो एक प्लेटफॉर्म (या स्टेप) का इस्तेमाल करता है। प्रतिभागी फर्श पर पैरों के कुछ पैटर्न को उन पैटर्नों के साथ जोड़ते हैं जिनमें प्लेटफॉर्म पर चढ़ना और उतरना पड़ता है। ये व्यायाम आमतौर पर संगीत की संगत में किए जाते हैं।
स्टेप एरोबिक्स पिंडलियों, नितंबों और पेट की मांसपेशियों जैसी निचले हिस्से की मांसपेशियों को सँवारता है।
जोड़ों या रीढ़ की तकलीफ़ वाले लोगों के लिए स्टेप की सलाह नहीं दी जाती।
सर्किट:
Circuit एरोबिक्स के बुनियादी कदमों को शक्ति प्रशिक्षण के साथ मिलाता है। इसमें केटलबेल और दूसरे वज़नों का इस्तेमाल होता है। Circuit न सिर्फ़ मांसपेशियों को सँवारता है बल्कि शरीर को सुडौल भी बनाता है—इसकी सलाह शुरुआती और अनुभवी दोनों तरह के प्रतिभागियों को दी जा सकती है।
फैट बर्निंग:
Fat Burning एरोबिक्स का एक बहुत लोकप्रिय रूप है। धीमे संगीत की संगत में किया जाने वाला आसान और कम थकाने वाला व्यायाम कूल्हों, जाँघों, नितंबों और पेट की मांसपेशियों को बेहतर बनाता है, पर सबसे बढ़कर—शरीर को सुडौल बनाने में असरदार है।
यह ट्रेनिंग जोड़ों पर बोझ नहीं डालती और इसीलिए इसे अधिक वज़न वाले लोगों के लिए खासतौर पर सुझाया जाता है।
कैलनेटिक्स:
व्यायाम का यह रूप खास मांसपेशी-समूहों को अलग करने के लिए सटीक मुद्राओं का इस्तेमाल करता है। इसके साथ छोटी पर असरदार हलचलें मांसपेशियों को गहरे स्तर पर काम कराती हैं और अधिक मांसपेशी-तंतुओं को सक्रिय करती हैं—इससे लचीलापन और ताकत बढ़ती है और मुद्रा बेहतर होती है।
Callanetics में हर मांसपेशी-समूह को गरमाया, काम कराया और फिर स्ट्रेच किया जाता है ताकि पूरे शरीर की तंदुरुस्ती बनी रहे।
स्ट्रेचिंग:
स्ट्रेचिंग सिर्फ़ एरोबिक्स के प्रकारों में से एक नहीं है—यह हर एरोबिक्स ट्रेनिंग का एक स्थायी हिस्सा भी है। स्ट्रेचिंग व्यायाम मांसपेशियों को लंबा और अधिक लचीला बनाते हैं, साथ ही जोड़ों की हलचल को भी बेहतर करते हैं। हर ट्रेनिंग के बाद स्ट्रेचिंग करना ज़रूरी है।